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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन
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श्लोक 43
श्लोक
13.49.43
प्रणीतमृषिभिर्ज्ञात्वा धर्मं शाश्वतमव्ययम्।
लुप्यमानं स्वधर्मेण क्षत्रियो ह्येष रक्षति॥ ४३॥
अनुवाद
ऋषियों द्वारा प्रतिपादित सनातन एवं अविनाशी धर्म को लुप्त होते हुए जानकर क्षत्रिय अपने धर्मानुसार उसकी रक्षा करता है ॥ 43॥
Knowing that the eternal and indestructible Dharma propounded by the sages is vanishing, the Kshatriya protects it according to his Dharma. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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