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mahabharat 13.47.2: भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! यदि किसी निःसंतान धनवान व्यक्ति से कन्या का मूल्य लिया गया हो, तो पिता का यह कर्तव्य है कि वह कन्या का मूल्य वापस मिलने तक हरसंभव रक्षा करे। जब तक खरीदी गई कन्या का मूल्य वापस न मिल जाए, तब तक वह कन्या उसी की मानी जाती है जिसने उसका मूल्य चुकाया था।   |   mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.47.2 
भीष्म उवाच
या पुत्रकस्य ऋद्धस्य प्रतिपाल्या तदा भवेत्।
अथ चेन्नाहरेच्छुल्कं क्रीता शुल्कप्रदस्य सा॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! यदि किसी निःसंतान धनवान व्यक्ति से कन्या का मूल्य लिया गया हो, तो पिता का यह कर्तव्य है कि वह कन्या का मूल्य वापस मिलने तक हरसंभव रक्षा करे। जब तक खरीदी गई कन्या का मूल्य वापस न मिल जाए, तब तक वह कन्या उसी की मानी जाती है जिसने उसका मूल्य चुकाया था।
 
Bhishma said- Yudhishthira! If the price of a daughter has been taken from a childless rich man, then it is the duty of the father to protect the daughter in every possible way until the daughter's price is returned. Until the price of the purchased girl is returned, the girl is considered to be of the person who paid the price.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)