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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार
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श्लोक 16
श्लोक
13.47.16
असूयवस्त्वधर्मिष्ठा: परस्वादायिन: शठा:।
आसुरादधिसम्भूता धर्माद् विषमवृत्तय:॥ १६॥
अनुवाद
राक्षसोंके साथ विवाह करनेसे उत्पन्न पुत्र दोषदर्शी, पापी, दूसरेका धन हड़पनेवाले, दुष्ट और धर्मके विरुद्ध आचरण करनेवाले होते हैं॥16॥
The sons born from marriages with demons are fault-finders, sinners, usurp other's wealth, are wicked and behave contrary to Dharma.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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