Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.47.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! जिस कन्या का मूल्य लिया गया है, यदि उससे विवाह करने के लिए कोई उपस्थित न हो, अर्थात् जिसने मूल्य दिया है, यदि वह परदेश चला गया हो और उसके भय से कोई दूसरा पुरुष उस कन्या से विवाह करने को तैयार न हो, तो उसके पिता को क्या करना चाहिए? कृपया मुझे यह बताइए।" | mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! जिस कन्या का मूल्य लिया गया है, यदि उससे विवाह करने के लिए कोई उपस्थित न हो, अर्थात् जिसने मूल्य दिया है, यदि वह परदेश चला गया हो और उसके भय से कोई दूसरा पुरुष उस कन्या से विवाह करने को तैयार न हो, तो उसके पिता को क्या करना चाहिए? कृपया मुझे यह बताइए।"
Yudhishthira asked, "Grandfather! If no one is present to marry the girl whose price has been taken, that is, if the person who paid the price has gone abroad and out of fear of him, no other man is ready to marry that girl, then what should her father do? Please tell me this."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥