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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना
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श्लोक 22
श्लोक
13.45.22
एवमेतासु रक्षा वै शक्या कर्तुं महात्मभि:।
अन्यथा राजशार्दूल न शक्या रक्षितुं स्त्रिय:॥ २२॥
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! ऐसी स्त्रियों की रक्षा महामनस्वी पुरुष ही कर सकते हैं; अन्यथा स्त्रियों की रक्षा असम्भव है ॥22॥
O best of kings! Such women can only be protected in this manner by great-minded men; otherwise, protection of women is impossible. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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