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mahabharat 13.43.9: अपने गुरु की पत्नी के शरीर में बैठे हुए विपुल ऋषि ने भगवान इन्द्र के ये वचन सुने और उन्होंने इन्द्र को भी देखा॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.43.9 
तमेवंवादिनं शक्रं शुश्राव विपुलो मुनि:।
गुरुपत्न्या: शरीरस्थो ददर्श त्रिदशाधिपम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अपने गुरु की पत्नी के शरीर में बैठे हुए विपुल ऋषि ने भगवान इन्द्र के ये वचन सुने और उन्होंने इन्द्र को भी देखा॥9॥
 
The sage Vipul, sitting in the body of his Guru's wife, heard these words of Lord Indra and he also saw Indra.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)