Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.43.6: नरेंद्र! जैसे ही उसने उठने की सोची, विपुल ने उसके शरीर को स्तब्ध कर दिया। वह उसके वश में थी और हिल भी नहीं पा रही थी।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.43.6 
उत्थातुकामा तु सती विष्टब्धा विपुलेन सा।
निगृहीता मनुष्येन्द्र न शशाक विचेष्टितुम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नरेंद्र! जैसे ही उसने उठने की सोची, विपुल ने उसके शरीर को स्तब्ध कर दिया। वह उसके वश में थी और हिल भी नहीं पा रही थी।
 
Narendra! As soon as she thought of getting up, Vipula stunned her body. She was under his control and could not even move.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)