Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.43.5: इन्द्र को देखते ही उसकी इच्छा हुई कि वह उठकर उनका स्वागत करे। वह उनके सुन्दर रूप को देखकर अत्यन्त आश्चर्यचकित हुई, मानो उनसे पूछना चाहती हो कि वे कौन हैं॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा तमालोक्य सहसा प्रत्युत्थातुमियेष ह।
रूपेण विस्मिता कोऽसीत्यथ वक्तुमिवेच्छती॥ ५॥
अनुवाद
इन्द्र को देखते ही उसकी इच्छा हुई कि वह उठकर उनका स्वागत करे। वह उनके सुन्दर रूप को देखकर अत्यन्त आश्चर्यचकित हुई, मानो उनसे पूछना चाहती हो कि वे कौन हैं॥5॥
On seeing Indra she suddenly felt like getting up to receive him. She was very surprised to see his beautiful form, as if she wanted to ask him who he was.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥