Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.43.35: गुरुवत्सल विपुल ने गुरु से यह वर माँगा कि ‘धर्म में मेरी स्थिति स्थिर रहे।’ तब गुरु की आज्ञा लेकर उसने उत्तम तप आरम्भ किया। 35॥ | mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्थितिं च धर्मे जग्राह स तस्माद् गुरुवत्सल:।
अनुज्ञातश्च गुरुणा चचारानुत्तमं तप:॥ ३५॥
अनुवाद
गुरुवत्सल विपुल ने गुरु से यह वर माँगा कि ‘धर्म में मेरी स्थिति स्थिर रहे।’ तब गुरु की आज्ञा लेकर उसने उत्तम तप आरम्भ किया। 35॥
Guruvatsal Vipul asked for this boon from the Guru that 'May my position in religion remain constant.' Then after taking Guru's permission, he started the best penance. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥