Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.43.33: विपुल की गुरुसेवा, आत्मभक्ति और धर्म के प्रति उसकी दृढ़ता देखकर गुरु ने ‘बहुत अच्छा, बहुत अच्छा’ कहकर उसकी प्रशंसा की ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.43.33 
विपुलस्य गुरौ वृत्तिं भक्तिमात्मनि तत्प्रभु:।
धर्मे च स्थिरतां दृष्ट्वा साधु साध्वित्यभाषत॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
विपुल की गुरुसेवा, आत्मभक्ति और धर्म के प्रति उसकी दृढ़ता देखकर गुरु ने ‘बहुत अच्छा, बहुत अच्छा’ कहकर उसकी प्रशंसा की ॥33॥
 
Seeing Vipul's service to the Guru, his devotion towards himself and his steadfastness towards religion, the Guru praised him by saying 'very good, very good'. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)