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mahabharat 13.43.27: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! महात्मा विपुल की वह बात सुनकर इन्द्र अत्यन्त लज्जित हुए और बिना कुछ उत्तर दिए वहीं अन्तर्धान हो गए।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.43.27 
भीष्म उवाच
तत् श्रुत्वा वचनं शक्रो विपुलस्य महात्मन:।
अकिंचिदुक्त्वा व्रीडार्तस्तत्रैवान्तरधीयत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! महात्मा विपुल की वह बात सुनकर इन्द्र अत्यन्त लज्जित हुए और बिना कुछ उत्तर दिए वहीं अन्तर्धान हो गए।
 
Bhishma says - Yudhishthira! On hearing that statement of Mahatma Vipul, Indra felt very ashamed and without giving any reply disappeared right there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)