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mahabharat 13.43.14: यह देखकर विपुल ने गुरुपत्नी के कहने के शब्द बदल दिए और अचानक उसके मुख से निकला - 'अरे! आपके यहाँ आने का क्या प्रयोजन है?'॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.43.14 
स तां वाचं गुरो: पत्न्या विपुल: पर्यवर्तयत्।
भो: किमागमने कृत्यमिति तस्यास्तु नि:सृता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर विपुल ने गुरुपत्नी के कहने के शब्द बदल दिए और अचानक उसके मुख से निकला - 'अरे! आपके यहाँ आने का क्या प्रयोजन है?'॥14॥
 
Seeing this, Vipul changed the words that Guru's wife wanted to say. Suddenly it came out of his mouth - 'Oh! What is the purpose of your coming here?'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)