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mahabharat 13.43.10: राजन! वह अपूर्व सुन्दरी रुचि विपुल के द्वारा स्तब्ध हो गई, अतः न तो उठ सकी और न ही इन्द्र को कोई उत्तर दे सकी।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.43.10 
न शशाक च सा राजन् प्रत्युत्थातुमनिन्दिता।
वक्तुं च नाशकद् राजन् विष्टब्धा विपुलेन सा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह अपूर्व सुन्दरी रुचि विपुल के द्वारा स्तब्ध हो गई, अतः न तो उठ सकी और न ही इन्द्र को कोई उत्तर दे सकी।
 
King! That incomparably beautiful Ruchi was stunned by Vipul and hence could neither get up nor give any answer to Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)