Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.40.28: वे न तो इन्द्रिय-सुख के लिए प्रचुर सामग्री को, न ही उत्तम आभूषणों को, न ही सुन्दर घरों को उतना महत्व देते हैं, जितना प्रेम के लिए किये जाने वाले भोग-विलास को देते हैं। 28. | mahabharat अध्याय 13.40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न कामभोगान् विपुलान् नालंकारान् न संश्रयान्।
तथैव बहु मन्यन्ते यथा रत्यामनुग्रहम्॥ २८॥
अनुवाद
वे न तो इन्द्रिय-सुख के लिए प्रचुर सामग्री को, न ही उत्तम आभूषणों को, न ही सुन्दर घरों को उतना महत्व देते हैं, जितना प्रेम के लिए किये जाने वाले भोग-विलास को देते हैं। 28.
They do not attach as much importance to abundant materials for sensual pleasures, nor to fine ornaments, nor to fine houses, as to the indulgences shown for the sake of love. 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥