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mahabharat 13.40.27: चाहे उनका पति, जो उनकी समस्त इच्छाओं को पूरा करने वाला है और उनकी इच्छानुसार कार्य करता है, उनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है, तो भी वे अपने पति का शासन सहन नहीं कर सकतीं। 27.   |   mahabharat अध्याय 13.40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.40.27 
कामानामपि दातारं कर्तारं मनसां प्रियम्।
रक्षितारं न मृष्यन्ति स्वभर्तारमलं स्त्रिय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
चाहे उनका पति, जो उनकी समस्त इच्छाओं को पूरा करने वाला है और उनकी इच्छानुसार कार्य करता है, उनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है, तो भी वे अपने पति का शासन सहन नहीं कर सकतीं। 27.
 
Even if their husband, who is the granter of all their desires and does whatever they desire, is always ready to protect them, they cannot tolerate the rule of their husband. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)