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युधिष्ठिर उवाच
स्त्रीणां स्वभावमिच्छामि श्रोतुं भरतसत्तम।
स्त्रियो हि मूलं दोषाणां लघुचित्ता हि ता: स्मृता:॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "भरतश्रेष्ठ! मैं स्त्रियों के स्वभाव का वर्णन सुनना चाहता हूँ; क्योंकि स्त्रियाँ समस्त बुराइयों की जड़ हैं। वे अल्पबुद्धि मानी जाती हैं।
Yudhishthira said, "Best of the Bharatas! I want to hear the description of the nature of women; because women are the root of all the evils. They are considered to have a low intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥