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यत्र यत्र च संदेहो भूयस्ते राजसत्तम।
तत्र तत्र च मां ब्रूहि च्छेत्तास्मि तव संशयम्॥ ६२॥
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! अब तुम्हें जहाँ कहीं भी कोई संदेह हो, मुझसे पूछो। मैं तुम्हारा संदेह दूर कर दूँगा।
O best of kings! Now wherever you have any doubts, ask me about them. I will clear your doubts.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विश्वामित्रोपाख्याने चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विश्वामित्रका उपाख्यानविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥