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mahabharat 13.4.42: राजा! अपने पति के मुख से यह वचन सुनकर सुन्दरी सत्यवती शोक से व्याकुल हो गई और वृक्ष से टूटी हुई सुन्दर लता के समान मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ी।   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.4.42 
सा श्रुत्वा शोकसंतप्ता पपात वरवर्णिनी।
भूमौ सत्यवती राजन् छिन्नेव रुचिरा लता॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राजा! अपने पति के मुख से यह वचन सुनकर सुन्दरी सत्यवती शोक से व्याकुल हो गई और वृक्ष से टूटी हुई सुन्दर लता के समान मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ी।
 
King! On hearing these words from her husband, the beautiful Satyavati became grief-stricken and fell on the ground unconscious like a beautiful creeper cut from a tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)