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mahabharat 13.4.32: "हे शुद्ध विनोदी मेरी अच्छी बेटी! यदि तुम मेरे वचनों को मानने योग्य समझती हो, तो हम वृक्षों का आदान-प्रदान भी कर सकते हैं।" ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.4.32 
व्यत्यासं वृक्षयोश्चापि करवाव शुचिस्मिते।
यदि प्रमाणं वचनं मम मातुरनिन्दिते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
"हे शुद्ध विनोदी मेरी अच्छी बेटी! यदि तुम मेरे वचनों को मानने योग्य समझती हो, तो हम वृक्षों का आदान-प्रदान भी कर सकते हैं।" ॥32॥
 
"My good daughter with pure humour! If you think my words are worth following, then we can even exchange trees." ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)