vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम
»
श्लोक 19
श्लोक
13.4.19
तत: स विस्मितो राजा गाधि: शापभयेन च।
ददौ तां समलंकृत्य कन्यां भृगुसुताय वै॥ १९॥
अनुवाद
तब आश्चर्यचकित राजा गाधि ने शाप के भय से अपनी पुत्री को वस्त्राभूषणों से सुसज्जित करके भृगुनन्दन ऋचीक को दे दिया ॥19॥
Then the surprised king Gadhi, fearing the curse, adorned his daughter with clothes and ornaments and gave her to Bhrigunandan Richik. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×