श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.4.19 
तत: स विस्मितो राजा गाधि: शापभयेन च।
ददौ तां समलंकृत्य कन्यां भृगुसुताय वै॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब आश्चर्यचकित राजा गाधि ने शाप के भय से अपनी पुत्री को वस्त्राभूषणों से सुसज्जित करके भृगुनन्दन ऋचीक को दे दिया ॥19॥
 
Then the surprised king Gadhi, fearing the curse, adorned his daughter with clothes and ornaments and gave her to Bhrigunandan Richik. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)