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mahabharat 13.4.16: तत्पश्चात् जब ऋचीक इस विषय में विचार कर रहा था, तभी गंगाजल से चन्द्रमा के समान कान्ति वाले एक हजार तेजस्वी घोड़े प्रकट हुए।   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.4.16 
ध्यातमात्रमृचीकेन हयानां चन्द्रवर्चसाम्।
गङ्गाजलात् समुत्तस्थौ सहस्रं विपुलौजसाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब ऋचीक इस विषय में विचार कर रहा था, तभी गंगाजल से चन्द्रमा के समान कान्ति वाले एक हजार तेजस्वी घोड़े प्रकट हुए।
 
Thereafter while Richika was thinking about this, a thousand brilliant horses having brilliance like the moon appeared from the water of Ganga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)