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mahabharat 13.38.8: वे जो कुछ मुझसे कहते हैं, उसे मैं संतुष्ट होकर बुद्धि से स्वीकार करता हूँ। मैं सदैव ब्राह्मणों के प्रति भक्ति रखता हूँ और सदैव उनके हित में विचार करता हूँ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.38.8 
यच्च भाषन्ति संतुष्टास्तच्च गृह्णामि मेधया।
समाधिमात्मनो नित्यमनुलोममचिन्तयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वे जो कुछ मुझसे कहते हैं, उसे मैं संतुष्ट होकर बुद्धि से स्वीकार करता हूँ। मैं सदैव ब्राह्मणों के प्रति भक्ति रखता हूँ और सदैव उनके हित में विचार करता हूँ ॥8॥
 
Being satisfied, I accept whatever they say to me through my intellect. I always maintain my devotion towards brahmins and always think in their favour. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)