Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.38.7: वे उपदेशक ब्राह्मण मुझे शास्त्रीय मार्ग का अनुसरण करने वाला और निर्दोष दृष्टि वाला ब्राह्मण भक्त जानकर, मुझे सदुपदेश रूपी अमृत से उसी प्रकार सींचते रहते हैं, जैसे मधुमक्खियाँ अपने मधुरूपी छत्ते को सींचती हैं॥7॥ | mahabharat अध्याय 13.38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे उपदेशक ब्राह्मण मुझे शास्त्रीय मार्ग का अनुसरण करने वाला और निर्दोष दृष्टि वाला ब्राह्मण भक्त जानकर, मुझे सदुपदेश रूपी अमृत से उसी प्रकार सींचते रहते हैं, जैसे मधुमक्खियाँ अपने मधुरूपी छत्ते को सींचती हैं॥7॥
Knowing me to be a Brahmin devotee following the classical path and having a faultless vision, those preacher Brahmins keep watering me with the nectar of good advice just like bees water their hive of honey. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥