Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.38.5: मैं उनके वचनों को सुनकर उनकी अवहेलना नहीं करता। मैं उनके प्रति कभी कोई अपराध नहीं करता। मैं उनकी पूजा करता हूँ, उनका कुशलक्षेम पूछता हूँ और बुद्धिमान ब्राह्मणों के चरण स्पर्श करता हूँ। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रुत्वा च नावजानामि नापराध्यामि कर्हिचित्।
अभ्यर्च्याभ्यनुपृच्छामि पादौ गृह्णामि धीमताम्॥ ५॥
अनुवाद
मैं उनके वचनों को सुनकर उनकी अवहेलना नहीं करता। मैं उनके प्रति कभी कोई अपराध नहीं करता। मैं उनकी पूजा करता हूँ, उनका कुशलक्षेम पूछता हूँ और बुद्धिमान ब्राह्मणों के चरण स्पर्श करता हूँ। ॥5॥
I do not disregard their words after hearing them. I never commit any crime against them. I worship them and ask about their well-being and I touch the feet of wise Brahmins. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥