श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.38.19 
भीष्म उवाच
श्रुत्वैतद् वचनं शक्रो दानवेन्द्रमुखाच्च्युतम्।
द्विजान् सम्पूजयामास महेन्द्रत्वमवाप च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भारत! दैत्यराज शम्बर के मुख से ये वचन सुनकर इन्द्र ने ब्राह्मणों का पूजन किया और इस प्रकार उन्होंने महेन्द्र पद प्राप्त किया।
 
Bhishma says - Bharat! After listening to these words from the mouth of the demon king Shambar, Indra worshipped the Brahmins and thus he attained the position of Mahendra.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि ब्राह्मणप्रशंसायामिन्द्रशम्बरसंवादे षट्‍‍त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें ब्राह्मणकी प्रशंसाके प्रसंगमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवादविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २० श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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