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mahabharat 13.38.15: जो अपने पिता के घर में रहकर समस्त वेदों का अध्ययन करता है, वह ज्ञानी और प्रशंसनीय होते हुए भी विद्वानों द्वारा ग्राम्य (अशिक्षित) माना जाता है। (वास्तव में जो गुरु के घर में कष्ट सहकर रहकर वेदों का अध्ययन करता है, वही श्रेष्ठ है।)॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 38: ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.38.15 
अपि च ज्ञानसम्पन्न: सर्वान् वेदान् पितुुर्गृहे।
श्लाघमान इवाधीयाद् ग्राम्य इत्येव तं विदु:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो अपने पिता के घर में रहकर समस्त वेदों का अध्ययन करता है, वह ज्ञानी और प्रशंसनीय होते हुए भी विद्वानों द्वारा ग्राम्य (अशिक्षित) माना जाता है। (वास्तव में जो गुरु के घर में कष्ट सहकर रहकर वेदों का अध्ययन करता है, वही श्रेष्ठ है।)॥15॥
 
He who studies all the Vedas while living in his father's house, in spite of being knowledgeable and praiseworthy, is considered a villager (uneducated) by the learned. (In reality, the one who studies Vedas while living in the Guru's house enduring hardships is the best.)॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)