प्रतिग्रहेण तेजो हि विप्राणां शाम्यतेऽनघ।
प्रतिग्रहं ये नेच्छेयुस्तेभ्यो रक्ष्यं त्वया नृप॥ २३॥
अनुवाद
हे भोले राजन! दान लेने से ब्राह्मणों का तेज क्षीण हो जाता है; अतः जो ब्राह्मण दान लेना नहीं चाहते, उनसे आप अपने कुल की रक्षा करें॥ 23॥
O innocent king! By accepting gifts, the glory of Brahmins is diminished; therefore you should protect your clan from those Brahmins who do not wish to accept gifts.॥ 23॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि ब्राह्मणप्रशंसायां पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें ब्राह्मणकी प्रशंसाविषयक
पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके दो श्लोक मिलाकर कुल २५ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥