श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.37.22 
तान् पूजयस्व सततं दानेन परिचर्यया।
यदीच्छसि महीं भोक्तुमिमां सागरमेखलाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर, यदि तुम समुद्र पर्यन्त पृथ्वी का राज्य भोगना चाहते हो तो सदैव ब्राह्मणों को दान देकर उनकी सेवा करो।
 
Yudhishthira, if you wish to enjoy the kingdom of the earth up to the sea, then always worship the brahmins by giving charity and serving them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)