श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.37.20 
अशक्यं स्प्रष्टुमाकाशमचाल्यो हिमवान् गिरि:।
अधार्या सेतुना गङ्गा दुर्जया ब्राह्मणा भुवि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जैसे आकाश को छूना, हिमालय को छेड़ना अथवा बाँध बनाकर गंगा के प्रवाह को रोकना असम्भव है, वैसे ही इस पृथ्वी पर ब्राह्मणों को परास्त करना सर्वथा असम्भव है ॥20॥
 
Just as it is impossible to touch the sky, disturb the Himalayas or stop the flow of Ganga by building a dam, similarly it is absolutely impossible to defeat the Brahmins on this earth. ॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)