श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  13.37.17-18 
मेकला द्राविडा लाटा: पौण्ड्रा: कान्वशिरास्तथा।
शौण्डिका दरदा दार्वाश्चौरा: शबरबर्बरा:॥ १७॥
किराता यवनाश्चैव तास्ता: क्षत्रियजातय:।
वृषलत्वमनुप्राप्ता ब्राह्मणानाममर्षणात्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मेकल, द्रविड़, लता, पौण्ड्र, कण्वशिरा, शौण्डिक, दरद, दर्वा, चोर, शबर, बर्बर, किरात और यवन - ये सभी पहले क्षत्रिय थे; परन्तु ब्राह्मणों के प्रति ईर्ष्या के कारण वे नीच हो गये॥17-18॥
 
Mekala, Dravida, Lata, Paundra, Kanvashira, Shaundika, Darada, Darva, Chor, Shabar, Barbar, Kirata and Yavana - all of them were Kshatriyas earlier; but due to jealousy towards the Brahmins they became lowly.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)