श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.37.16 
सन्ति चाशीविषसमा: सन्ति मन्दास्तथापरे।
विविधानीह वृत्तानि ब्राह्मणानां युधिष्ठिर॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कुछ ब्राह्मण विषैले सर्पों के समान भयंकर होते हैं और कुछ सौम्य स्वभाव के। युधिष्ठिर! इस संसार में ब्राह्मणों का स्वभाव और आचरण अनेक प्रकार का होता है॥16॥
 
Some Brahmins are as fierce as poisonous snakes and some are of mild nature. Yudhishthira! In this world the nature and conduct of Brahmins are of many types.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)