श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.37.15 
सर्पस्पर्शसमा: केचित् तथान्ये मकरस्पृश:।
विभाष्यघातिन: केचित् तथा चक्षुर्हणोऽपरे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
किसी का स्पर्श सर्प के समान है, किसी का मगरमच्छ के समान। कोई शाप देकर मार डालता है, तो कोई क्रोध भरी दृष्टि से देखकर ही भस्म कर देता है॥15॥
 
Some people's touch is like that of a snake, some like that of a crocodile. Some kill by cursing, while others turn them into ashes just by looking at them with wrathful eyes.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)