कुन्तीनन्दन! इस दृष्टान्त और ब्राह्मणों की महानता को सुनकर तुम्हें सदैव शुद्ध भावना से श्रेष्ठ ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए। इससे तुम कल्याण के भागी होगे। 31॥
Kuntinandan! After listening to this example and the greatness of Brahmins, you should always worship the best Brahmins with pure feelings. With this you will be a part of welfare. 31॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पृथ्वीवासुदेवसंवादे चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें पृथ्वी और वासुदेवका संवादविषयक चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥