श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 36: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.36.21 
वासुदेव उवाच
मातरं सर्वभूतानां पृच्छे त्वां संशयं शुभे।
केनस्वित् कर्मणा पापं व्यपोहति नरो गृही॥ २१॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ने पूछा- शुभे! आप समस्त प्राणियों की माता हैं, इसीलिए मैं आपसे एक शंका पूछ रहा हूँ। कौन-सा कर्म करने से गृहस्थ अपने पापों का नाश कर सकता है?॥ 21॥
 
Shri Krishna asked- Shubh! You are the mother of all beings, that is why I am asking you a doubt. By performing which deed can a householder destroy his sins?॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)