श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 36: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.36.19 
यत् किंचित् कथ्यते लोके श्रूयते पठ्यतेऽपि वा।
सर्वं तद् ब्राह्मणेष्वेव गूढोऽग्निरिव दारुषु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
संसार में जो कुछ कहा, सुना या पढ़ा जाता है, वह सब ब्राह्मणों के भीतर लकड़ी में छिपी हुई अग्नि के समान विद्यमान रहता है ॥19॥
 
Whatever is said, heard or read in the world, it all exists within the Brahmins like the fire hidden in the wood. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)