श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 36: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.36.1 
भीष्म उवाच
ब्राह्मणानेव सततं भृशं सम्परिपूजयेत्।
एते हि सोमराजान ईश्वरा: सुखदु:खयो:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ब्राह्मणों का सदैव विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए। चन्द्रमा उनका राजा है। वह मनुष्य को सुख-दुःख देने में समर्थ है।॥1॥
 
Bhishmaji says-Yudhishthira! Brahmins should always be worshipped properly. Moon is their king. It is capable of giving happiness and sorrow to a human being.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)