Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.35.27: हे राजन! जिस प्रकार वायु को मुट्ठी में पकड़ना, चन्द्रमा को हाथ से छूना और पृथ्वी को उठाना अत्यन्त कठिन है, उसी प्रकार इस पृथ्वी पर ब्राह्मणों को हराना भी अत्यन्त कठिन है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 13.35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! जिस प्रकार वायु को मुट्ठी में पकड़ना, चन्द्रमा को हाथ से छूना और पृथ्वी को उठाना अत्यन्त कठिन है, उसी प्रकार इस पृथ्वी पर ब्राह्मणों को हराना भी अत्यन्त कठिन है॥ 27॥
O King! Just as it is very difficult to hold the air in the fist, to touch the moon with the hand and to lift the earth, in the same way it is very difficult to defeat the Brahmins on this earth.॥ 27॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि ब्राह्मणप्रशंसा नाम त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें ब्राह्मणकी प्रशंसा नामक तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर २७ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥