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mahabharat 13.35.24: समस्त ब्रह्माण्ड की हत्या करने वाले और ब्राह्मण की हत्या करने वाले का पाप एक समान नहीं है। महर्षि कहते हैं कि ब्राह्मण की हत्या महापाप है। 24.   |   mahabharat अध्याय 13.35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.35.24 
यस्तु सर्वमिदं हन्याद् ब्राह्मणं च न तत्समम्।
ब्रह्मवध्या महान् दोष इत्याहु: परमर्षय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
समस्त ब्रह्माण्ड की हत्या करने वाले और ब्राह्मण की हत्या करने वाले का पाप एक समान नहीं है। महर्षि कहते हैं कि ब्राह्मण की हत्या महापाप है। 24.
 
The sin of one who kills the entire universe and one who kills a Brahmin is not the same. The great sages say that killing a Brahmin is a great sin. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)