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mahabharat 13.35.20: जिस मनुष्य की ब्राह्मण स्तुति करते हैं, वह समृद्ध होता है और जिस मनुष्य को वे शाप देते हैं, वह क्षण भर में नष्ट हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.35.20 
ब्राह्मणा यं प्रशंसन्ति पुरुष: स प्रवर्धते।
ब्राह्मणैर्य: पराकृष्ट: पराभूयात् क्षणाद्धि स:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जिस मनुष्य की ब्राह्मण स्तुति करते हैं, वह समृद्ध होता है और जिस मनुष्य को वे शाप देते हैं, वह क्षण भर में नष्ट हो जाता है।
 
The man whom the brahmins praise, prospers and the man whom they curse, gets destroyed in a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)