Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.35.17: वे चाहें तो किसी अ-ईश्वर को भी ईश्वर बना सकते हैं और किसी ईश्वर को भी उसकी दिव्यता से नीचे गिरा सकते हैं। जिसे वे राजा बनाना चाहते हैं, वही राजा रह सकता है। जिसे वे राजा नहीं देखना चाहते, वही पराजित हो जाता है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.35.17 
अदैवं दैवतं कुर्युर्दैवतं चाप्यदैवतम्।
यमिच्छेयु: स राजा स्याद् यो नेष्ट: स पराभवेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे चाहें तो किसी अ-ईश्वर को भी ईश्वर बना सकते हैं और किसी ईश्वर को भी उसकी दिव्यता से नीचे गिरा सकते हैं। जिसे वे राजा बनाना चाहते हैं, वही राजा रह सकता है। जिसे वे राजा नहीं देखना चाहते, वही पराजित हो जाता है॥17॥
 
If they wish, they can make a non-God a God and can also bring down a God from his divinity. Only the one they wish to make a King can remain a King. The one they do not wish to see as a King gets defeated.॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)