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mahabharat 13.34.9: ‘कबूतर! आज ही मैं तुम्हारी रक्षा के लिए इस काशी राज्य अर्थात् प्रकाशमान उशीनर देश का राज्य तथा अपना प्राण भी त्याग दूँगा। ऐसा विश्वास करो और निश्चिंत रहो। अब तुम्हें कोई भय नहीं है।’॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.34.9 
काशिराज्यं तदद्यैव त्वदर्थं जीवितं तथा।
त्यजेयं भव विश्रब्ध: कपोत न भयं तव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘कबूतर! आज ही मैं तुम्हारी रक्षा के लिए इस काशी राज्य अर्थात् प्रकाशमान उशीनर देश का राज्य तथा अपना प्राण भी त्याग दूँगा। ऐसा विश्वास करो और निश्चिंत रहो। अब तुम्हें कोई भय नहीं है।’॥9॥
 
‘Pigeon! Today itself I will sacrifice this kingdom of Kashi i.e. the kingdom of the luminous Ushinar country and even my life for your protection. Believe in this and be at peace. Now you have no fear.’॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)