श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.34.7 
नवनीलोत्पलापीडचारुवर्ण सुदर्शन।
दाडिमाशोकपुष्पाक्ष मा त्रसस्वाभयं तव॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"तुम्हारी कांति नवीन नीले कमल के हार के समान है। तुम देखने में अत्यंत सुंदर हो। तुम्हारी आँखें अनार और अशोक के फूलों के समान लाल हैं। डरो मत। मैं तुम्हें रक्षा का वरदान देता हूँ।"
 
‘Your radiance is like a new blue lotus necklace. You are very beautiful to look at. Your eyes are red like pomegranate and Ashoka flowers. Do not be afraid. I give you the boon of protection.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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