Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.34.33: तभी एक दिव्य विमान प्रकट हुआ, जिसमें सोने के महल थे, सोने और बहुमूल्य रत्नों की झालरें थीं और लाजवर्द के स्तंभ उस स्थान को सुशोभित कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हेमप्रासादसम्बाधं मणिकाञ्चनतोरणम्।
स वैदूर्यमणिस्तम्भं विमानं समधिष्ठित:॥ ३३॥
अनुवाद
तभी एक दिव्य विमान प्रकट हुआ, जिसमें सोने के महल थे, सोने और बहुमूल्य रत्नों की झालरें थीं और लाजवर्द के स्तंभ उस स्थान को सुशोभित कर रहे थे।
Just then a divine plane appeared in which there were palaces made of gold. There were festoons of gold and precious stones and pillars of lapis lazuli were adorning the place. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥