vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति
»
श्लोक 26-27h
श्लोक
13.34.26-27h
निरुद्धं गगनं सर्वं शुभ्रं मेघै: समन्तत:॥ २६॥
मही प्रचलिता चासीत् तस्य सत्येन कर्मणा।
अनुवाद
सम्पूर्ण श्वेत आकाश चारों ओर से बादलों से आच्छादित हो गया। उसके सत्य कर्मों के प्रभाव से पृथ्वी काँपने लगी।
The entire white sky was covered with clouds from all sides. The earth began to tremble due to the effect of his true deeds. 26 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×