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mahabharat 13.34.22: हे निष्पाप राजा उशीनर! यदि इस कबूतर पर आपका बड़ा स्नेह है, तो कृपया इसके बराबर तराजू पर तौला हुआ अपना मांस मुझे दे दीजिए॥22॥   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.34.22 
उशीनर कपोते तु यदि स्नेहस्तवानघ।
ततस्त्वं मे प्रयच्छाद्य स्वमांसं तुलया धृतम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा उशीनर! यदि इस कबूतर पर आपका बड़ा स्नेह है, तो कृपया इसके बराबर तराजू पर तौला हुआ अपना मांस मुझे दे दीजिए॥22॥
 
O sinless King Ushinar! If you have great affection for this pigeon, then please give me your own flesh, weighed on a scale, equal to it. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)