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mahabharat 13.34.15: यदि तुममें शक्ति है, तो अपने शत्रुओं, सेवकों, सम्बन्धियों, वादी-प्रतिवादी के व्यवहार (वादी-प्रतिवादी के मामलों) और इन्द्रियों के विषयों पर अपना पराक्रम दिखाओ। आकाश में रहने वालों पर अपना बल मत चलाओ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.34.15 
यदि वैरिषु भृत्येषु स्वजनव्यवहारयो:।
विषयेष्विन्द्रियाणां च आकाशे मा पराक्रम॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि तुममें शक्ति है, तो अपने शत्रुओं, सेवकों, सम्बन्धियों, वादी-प्रतिवादी के व्यवहार (वादी-प्रतिवादी के मामलों) और इन्द्रियों के विषयों पर अपना पराक्रम दिखाओ। आकाश में रहने वालों पर अपना बल मत चलाओ॥15॥
 
If you have power, then show your prowess over your enemies, servants, relatives, the behaviour of plaintiff and defendant (matters of plaintiff and plaintiff) and the objects of the senses. Do not use your strength over those who live in the sky.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)