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mahabharat 13.34.11: इसका रक्त, मांस, मज्जा और चर्बी सब मेरे लिए लाभदायक हैं। यह कबूतर मेरी भूख मिटाकर मुझे पूर्णतया तृप्त कर देगा; अतः कृपया आकर मेरे भोजन में विघ्न न डालें ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.34.11 
मांसं च रुधिरं चास्य मज्जा मेदश्च मे हितम्।
परितोषकरो ह्येष मम मास्याग्रतो भव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसका रक्त, मांस, मज्जा और चर्बी सब मेरे लिए लाभदायक हैं। यह कबूतर मेरी भूख मिटाकर मुझे पूर्णतया तृप्त कर देगा; अतः कृपया आकर मेरे भोजन में विघ्न न डालें ॥11॥
 
Its blood, flesh, marrow and fat are all beneficial for me. This pigeon will satisfy my hunger and make me completely satisfied; therefore please do not come and disturb my food. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)