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mahabharat 13.32.62: विहव्य के पुत्र का नाम विटत्य था। विटत्य के पुत्र सत्य और सत्य के पुत्र मुनि हुए ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  13.32.62 
विहव्यस्य तु पुत्रस्तु वितत्यस्तस्य चात्मज:।
वितत्यस्य सुत: सत्य: संत: सत्यस्य चात्मज:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
विहव्य के पुत्र का नाम विटत्य था। विटत्य के पुत्र सत्य और सत्य के पुत्र मुनि हुए ॥62॥
 
Vihavya's son's name was Vitatya. Vitatya's son Satya and Satya's son became saints. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)