Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.32.59-60: ऋग्वेद में महर्षि गृत्समद की महान श्रुति विद्यमान है। हे राजन! वहाँ के ब्राह्मण गृत्समद का बहुत आदर करते हैं। ब्रह्मर्षि गृत्समद अत्यंत तेजस्वी और ब्रह्मचारी थे। 59-60। | mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋग्वेदे वर्तते चाग्रॺा श्रुतिर्यस्य महात्मन:॥ ५९॥
यत्र गृत्समदो राजन् ब्राह्मणै: स महीयते।
स ब्रह्मचारी विप्रर्षि: श्रीमान् गृत्समदोऽभवत्॥ ६०॥
अनुवाद
ऋग्वेद में महर्षि गृत्समद की महान श्रुति विद्यमान है। हे राजन! वहाँ के ब्राह्मण गृत्समद का बहुत आदर करते हैं। ब्रह्मर्षि गृत्समद अत्यंत तेजस्वी और ब्रह्मचारी थे। 59-60।
The great Shruti of the great sage Gritsamad is present in the Rigveda. O King! The Brahmins there respect Gritsamad a lot. Brahmarshi Gritsamad was very brilliant and a celibate. 59-60.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥