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mahabharat 13.32.42: तत्पश्चात् पराक्रमी राजा प्रतर्दन ने अपने शस्त्रों से शत्रुओं के शस्त्रों को नष्ट करके वज्र और अग्नि के समान तेजस्वी बाणों द्वारा उन सबको मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.32.42 
अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य तेषां राजा प्रतर्दन:।
जघान तान् महातेजा वज्रानलसमै: शरै:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी राजा प्रतर्दन ने अपने शस्त्रों से शत्रुओं के शस्त्रों को नष्ट करके वज्र और अग्नि के समान तेजस्वी बाणों द्वारा उन सबको मार डाला।
 
Then the mighty King Pratardana, having warded off the weapons of his enemies with his own weapons, killed them all with arrows as radiant as thunderbolts and fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)